
वो अब सिर्फ हमरा बिटुवा नहीं पूरा बिहार का बिटुवा’
वैभव सूर्यवंशी के पिता ने कहा, ‘राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें नागपुर में ट्रायल के लिए बुलाया था. विक्रम राठौर सर (बल्लेबाजी कोच) ने एक मैच का टास्क दिया, जिसमें उन्हें एक ओवर में 17 रन बनाने थे. बिटुवा ने 3 छक्के मारे. ट्रायल में उन्होंने 8 छक्के और 4 चौके
– वैभव के कोच और पिता संजीव सूर्यवंशी
IPL AUCTION 2025=के इतिहास में ऑक्शन में खरीदे जाने वाले सबसे युवा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं। उनके पिता को क्रिकेट पसंद था, लेकिन वह कभी इस लेवल पर नहीं पहुंच पाए; इसलिए उनका सपना था कि उनका बेटा क्रिकेटर बने। वैभव के कोच उनके पिता ही हैं।
यूथ क्रिकेट में शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज वैभव ने IPL 2025 Auction में भी झंडे गाड़ दिए हैं। बिहार के समस्तीपुर से आने वाले वैभव IPL के अगले सीजन में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलेंगे। RR ने उनको 1.10 करोड़ रुपये में साइन किया है।
10 वर्षीय बेटे के क्रिकेट के सपने को पूरा करने के लिए अपनी खेती की ज़मीन बेच देने वाले संजीव सूर्यवंशी, वैभव की इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद कठिनाइयों के दिनों को याद करते हुए भावुक हो उठे।
“हमने तो अपनी ज़मीन तक बेच दिया, अभी भी हालत पूरी सुधरा नहीं है। वो अब सिर्फ हमारा बिटुवा नहीं है, पूरा बिहार का बिटुवा है।”
वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के ताजपुर गाँव में हुआ था। उन्होंने सिर्फ 4 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनके किसान पिता ने अपने बेटे के क्रिकेट के प्रति जुनून को पहचाना और घर के पीछे एक छोटा खेल का मैदान बनाकर उसे नेट प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया।
जब वैभव 9 साल के हुए, तो उनके पिता ने उन्हें पास के समस्तीपुर के एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया और रोज़ गाँव से समस्तीपुर लाते- ले जाते।
दो साल छह महीने प्रैक्टिस करने के बाद, वैभव विजय मर्चेंट ट्रॉफी के लिए अंडर-16 ट्रायल दिया। उन्हें रणजी खिलाड़ी रहे मनीष ओझा से कोचिंग करने का मौका मिला। वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा जल्दी ही सबके सामने आ गई। 12 साल की छोटी उम्र में उन्होंने बिहार के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी खेली और सिर्फ पांच मैचों में लगभग 400 रन बनाए।
ब्रायन लारा को अपना आदर्श मानने वाले वैभव सूर्यवंशी 1986 के बाद भारत के सबसे कम उम्र में फर्स्ट-क्लास डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने और बिहार की रणजी ट्रॉफी टीम के लिए खेलने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी।
वैभव का करियर अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन उनके खेल ने उनकी काबिलियत के पक्के संकेत दे दिए हैं। बिहार से IPL तक का उनका सफर, पिता के संघर्षों के अलावा उनकी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का प्रमाण है।
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